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टूटी अथवा चोटल पसलियाà¤
टूटी अथवा चोटल पसलियाठअकà¥à¤¸à¤° गिरने, छाती पर घूंसा लगने अथवा कà¤à¥€-कà¤à¥€ गहन खांसी के कारण à¤à¥€ हो सकती हैं। वे अतà¥à¤¯à¤¨à¥à¤¤ कषà¥à¤Ÿà¤¦à¤¾à¤¯à¥€ हो सकती हैं, परनà¥à¤¤à¥ आमतौर से उनमें तीन से छ: सपà¥à¤¤à¤¾à¤¹ के à¤à¥€à¤¤à¤° सà¥à¤§à¤¾à¤° आ जाता है।
यदि आपको लगता हैं कि आपकी पसलियों को चोट पहà¥à¤‚ची है, तो आप अकà¥à¤¸à¤° सà¥à¤µà¤¯à¤‚ की देखà¤à¤¾à¤² घर पर ही कर सकते हैं। पसलियों को खपचà¥à¤šà¥€ पर बांधना अथवा अनà¥à¤¯ हडà¥à¤¡à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ की तरह सहारा देना मà¥à¤¶à¥à¤•िल है इसलिठउनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ पà¥à¤°à¤¾à¤•ृतिक रूप से ठीक होने दिया जाता है।
आम तौर पर टूटी और चोटल पसलियों का उपचार à¤à¤• ही तरीके से किया जाता है, तà¤à¥€ इस पà¥à¤°à¤•ार की चोट को निरà¥à¤§à¤¾à¤°à¤¿à¤¤ करने के लिठà¤à¤•à¥à¤¸-रे लेना आवशà¥à¤¯à¤• नहीं होता है।
आम तौर पर आपको चिकितà¥à¤¸à¥€à¤¯ परामरà¥à¤¶ लेने की आवशà¥à¤¯à¤•ता तब होती है जब हालात और खराब होने लगते हैं अथवा उनमें सà¥à¤§à¤¾à¤° नहीं होता है, या अगर आप किसी गंà¤à¥€à¤° दà¥à¤°à¥à¤˜à¤Ÿà¤¨à¤¾ में घायल हà¥à¤¯à¥‡ हैं। अधिक जानकारी के लिये नीचे ‘डॉकà¥à¤Ÿà¤° को कब संपरà¥à¤• करें’, देखें।
मैं कैसे कह सकता हूं कि मेरी पसलियों को चोट पहà¥à¤‚ची है?
à¤à¤• टूटी अथवा चोटल पसली अतà¥à¤¯à¤¨à¥à¤¤ दरà¥à¤¦ दायक होगी, विशेषत: जब आप सांस सांस लेते हैं।
आपको à¤à¤¸à¤¾ लगेगा कि आप केवल हलà¥à¤•ी सांस ही ले सकते हैं परंतॠयह महतà¥à¤µà¤ªà¥‚रà¥à¤£ है कि अपने फेफड़ों से बलगम हटाने और छाती के संकà¥à¤°à¤®à¤£à¥‹à¤‚
से रोकथाम के लिये आप सामानà¥à¤¯ रूप से सांस लें।
आपकी छाती पर सूजन आ सकती है अथवा उसमे नरमी हो सकती है और तà¥à¤µà¤šà¤¾ पर खरोंचे à¤à¥€ आ सकती हैं।
अपनी चोट का घर पर देखà¤à¤¾à¤² करना
अधिकांश मामलों में, आप टूटी अथवा चोटल पसलियों की देखà¤à¤¾à¤² घर पर ही कर सकते हैं। चोट ठीक होने के दौरान, दरà¥à¤¦-निवारण अतà¥à¤¯à¤¨à¥à¤¤ महतà¥à¤µà¤ªà¥‚रà¥à¤£ होता है, कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि इस समय सांस लेना अथवा खांसना अतà¥à¤¯à¤‚त कषà¥à¤Ÿà¤¦à¤¾à¤¯à¤• हो सकता है। दरà¥à¤¦ से बचने के लिये हलकी सांस लेना और न खांसना आपको छाती में संकà¥à¤°à¤®à¤£ करने का जोखिम कर सकती है।
निमà¥à¤¨ उपायों से आप सà¥à¤µà¤¯à¤‚ की देखà¤à¤¾à¤² कर सकते हैं :
नियमित रूप से दरà¥à¤¦-निवारक दवाइयाठलेना (बिना नà¥à¤¸à¥à¤–े दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ पà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥à¤¤- फारà¥à¤®à¥‡à¤¸à¥€ से), जैसे की पैरासेटमोल
और इबà¥à¤ªà¥à¤°à¥‹à¤«à¥‡à¤¨
(16 वरà¥à¤· से कम की आयॠके बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ को à¤à¤¸à¥à¤ªà¥à¤°à¤¿à¤¨
नहीं दी जानी चाहिये) – पैकट पर दी गई खà¥à¤°à¤¾à¤• निरà¥à¤¦à¥‡à¤¶à¥‹à¤‚ का पालन करें
छाती पर बरà¥à¤« पैक रखना – दरà¥à¤¦ और सूजन कम करने के लिये नियमित रूप से पहले कà¥à¤› दिन – तौलिये में लिपटे ठंडे मटरों का बैग à¤à¥€ पà¥à¤°à¤¯à¥‹à¤— किया जा सकता है
समय समय पर विशà¥à¤°à¤¾à¤® करना – कारà¥à¤¯ से छà¥à¤Ÿà¥à¤Ÿà¥€ लें, विशेषत: तब जब आपको आपके कारà¥à¤¯ में शारीरिक ताकत लगानी पड़ती है अथवा दरà¥à¤¦ अतà¥à¤¯à¤§à¤¿à¤• है
विशà¥à¤°à¤¾à¤® अवधियों के बीच चलते-फिरते रहें – आस-पास चलना और समय समय पर कंधा हिलाना आपको सांस लेने में सहायता और फेफड़ों से बलगम साफ कर सकता है
खांसी करते समय छाती को तकिठसे सहारा दे
सांस लेने का अà¤à¥à¤¯à¤¾à¤¸ करना ( à¤à¤•à¥à¤¸à¤°à¤¸à¤¾à¤‡à¤œà¥‡à¤œ) – पà¥à¤°à¤¤à¥à¤¯à¥‡à¤• घंटे पर 10 धीमी, गहरी सांस लें ताकि पà¥à¤°à¤¤à¥à¤¯à¥‡à¤• बार आपके फेफड़े फूल जायें व फेफड़ों को साफ रख सकने में सहायता हो
अपनी छाती के इरà¥à¤¦-गिरà¥à¤¦ कस कर पटà¥à¤Ÿà¥€ न लपेटें कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि इससे आपके फेफड़ों का ठीक तरह से फैलाव होना रूक जायेगा। लमà¥à¤¬à¥€ समयावधि के लिये लेटने अथवा सà¥à¤¥à¤¿à¤° रहने से बचने का पà¥à¤°à¤¯à¤¾à¤¸ करें। पहली कà¥à¤› रातों के लिये यह आपको सीधे सोने में सहायता करेगा।
अचà¥à¤›à¤¾ महसूस करने तक तनाव लेने और à¤à¤¾à¤°à¥€ पदारà¥à¤¥ उठाने से बचें कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि आप सà¥à¤µà¤¯à¤‚ को और अधिक चोट पहà¥à¤‚चा सकते हैं और ठीक होने में लमà¥à¤¬à¤¾ समय लग सकता है। यदि आप धूमà¥à¤°à¤ªà¤¾à¤¨ करते हैं, तो इसे रोकना à¤à¥€ ठीक होने में सहायक होगा। धूमà¥à¤°à¤ªà¤¾à¤¨ रोकने में आपकी सहायता करना
पर आवशà¥à¤¯à¤• जानकारी दी गई है।
डॉकà¥à¤Ÿà¤° को कब संपरà¥à¤• करें
यदि कà¥à¤› सपà¥à¤¤à¤¾à¤¹à¥‹à¤‚ में दरà¥à¤¦ में सà¥à¤§à¤¾à¤° नहीं होता है तो अपने डॉकà¥à¤Ÿà¤° से संपरà¥à¤• करें। वे आपको अधिक शकà¥à¤¤à¤¿à¤¶à¤¾à¤²à¥€ दरà¥à¤¦-निवारक औषधियों का नà¥à¤¸à¥à¤–ा दे सकते हैं अथवा आवशà¥à¤¯à¤•तानà¥à¤¸à¤¾à¤° आगे के उपचार के लिये आपको हॉसà¥à¤ªà¤¿à¤Ÿà¤² à¤à¥‡à¤œ सकते हैं।
निमà¥à¤¨ पà¥à¤°à¤•ार की अधिक गंà¤à¥€à¤° चिनà¥à¤¹ विकसित होने पर तà¥à¤°à¤¨à¥à¤¤ चिकितà¥à¤¸à¥€à¤¯ सहायता पà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥à¤¤ करें:
सांस लेने में तकलीफ होना
छाती के दरà¥à¤¦
में वृदà¥à¤§à¤¿
आपके पेट अथवा कनà¥à¤§à¥‡ में दरà¥à¤¦
खांसी में खून आना
पीली अथवा हरी बलगम की खांसी होना
38C (100.4F) अथवा अधिक का उचà¥à¤š ताप (जà¥à¤µà¤°)
उपरोकà¥à¤¤ लकà¥à¤·à¤£ छाती का संकà¥à¤°à¤®à¤£ दरà¥à¤¶à¤¾ सकते हैं अथवा यह à¤à¥€ हो सकता है कि टूटी हà¥à¤ˆ पसली ने आपका फेफड़ा कà¥à¤·à¤¤à¤¿à¤—à¥à¤°à¤¸à¥à¤¤ कर दिया है जिससे आपका फेफड़ा खराब (नà¥à¤¯à¥‚मोथोरेकà¥à¤¸)हो सकता है या किसी अनà¥à¤¯ अंग को à¤à¥€ को à¤à¥€ कà¥à¤·à¤¤à¤¿ पहà¥à¤‚ची हो सकती है जैसे सà¥à¤ªà¥à¤²à¥€à¤¨ या लीवर।
यदि आपको चोट किसी गंà¤à¥€à¤° दà¥à¤°à¥à¤˜à¤Ÿà¤¨à¤¾ में आई है जैसे यातायात दà¥à¤°à¥à¤˜à¤Ÿà¤¨à¤¾, तो उसके आंकलन के लिठसीधे अपने सबसे निकट के आपातकालीन विà¤à¤¾à¤— में जायें।
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